काशीपुर के सुरेश बाउरी नहीं रहे
बुधवार, 22 अप्रैल 2009 00:00
व्यवस्थापक
प्रे.सं., शिलचर : विगत १६ अप्रैल को नूतन काशीपुर चाय बागान के निवासी सुरेश चन्द्र बाउरी का निधन हो गया। मृत्यु के दौरान उनकी उम्र ८७ वर्ष थी। वे एक समाजसेवी, प्रवीण कांग्रेस र्कायकर्ता तथा काछाड़ चाय श्रमिक युनियन के र्कायरत सदस्य थे। उनकी मृत्यु की खबर से काशीपुर चाय बागान तथा संलग्न चाय बागान के लोगों में शोक छा गया है। उनके देहांत की खबर मिलते ही काछाड़ चाय श्रमिक युनियन के सह-सचिव तथा अमस के संसदीय सचिव अजीत सिंह और विभिन्न समुदाय के लोग उनके घर पहुँचे। मृत्यु के समय वे अपने पीछे दो पुत्र तथा तीन कन्या छोड़ गये। १९ अप्रैल को स्वर्गीय सुरेश चन्द्र बाउरी की याद में एक शोक सभा का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता उमाशंकर ग्वाला ने की।
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डलु बागान में ३ करोड़ का पीएफ घोटाला
बुधवार, 22 अप्रैल 2009 00:00
व्यवस्थापक
मैनेजर से पूछताछ जारी प्रे.सं., शिलचर : श्रमिकों के पैसे के साथ खिलवाड़ का नजारा डलु चाय बागान में दिख रहा है, वह भी ३ करोड़ रुपये का घोटाला । जो श्रमिक नियमित कड़ी धूप, बरसात में चाय की पत्ती तोड़कर, फावड़ा चलाकर अपना खूनपसीना एक करके बागान की आमदनी में बढ़ोत्तरी किये । उन्ही श्रमिकों के साथ प्रबंधन ने इतना बड़ा अन्याय किया। सात साल यानी २००० सन से २००७ साल तक श्रमिकों के मेहनत के पैसे को प्राविडेट फंड में जमा नहीं किया ।
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कलाईन चाय बागान मामले में एक गिरफ्तार
बुधवार, 15 अप्रैल 2009 00:00
व्यवस्थापक
प्रे.सं. शिलचर: विगत दिनों डीएचडी जुयेल उग्रवादी संगठन के नाम पर कलाईन चाय बागान के प्रबंधक आर के मिश्र को १० लाख रूपये की माँग किया गया था। रूपये नहीं देने पर जान से मारने की धमकी भी उग्रवादी संगठन के और से दिया गयै था। इस मामले के जाचँ करते हुए पुलिस ने अबतक कटीगोड़ा थाने के अन्तर्गत बुरूंगा के रहने वाली महिला मामूनी दास को गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उनके नाम के ही मोबाइल सीम उपयोग में लाया गया था और उसी सीम के तहत अनेकों बार धमकिया दी गयी थी। कलाईन चाय बागान प्रशासन के और से पूरी सहायता दी जा रही है दूसरे ओर एक मोबाइल नम्बर की पहचान की जा रही है।
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बड़खला थाने के पास शराब भट्टी
शनिवार, 11 अप्रैल 2009 00:00
व्यवस्थापक
प्रे.सं., शिलचर : बड़खला बाजार में शराब और शराबियों का जमघट दिन व दिन बढ़ता जा रहा है। शाम होते ही इन लोगों की वजह से राह चलना मुश्किल हो जाता है। नशे में युवा पीढ़ी इस कदर डुबी हुई है कि उनके भविष्य को लेकर समाज में चिन्ता जताई जा रही है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि थाने के ठीक पास में ही एक दुकान में खुले तौर पर शराब बेचा जाता है जिसमें खुद पुलिस वाले भी आते हैं और लुफ्त उठाते हैं। इसलिए उस दुकानदार के लिए यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि ‘जब सैंया भये कोतवाल तो अब डर काहे का’। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस व्यवसाय से काफी चाँदी काट रही है पुलिस भी। थाने के निकटवर्ती दुकान के अलावा बड़खला अस्पताल के पास पान की दुकान, दवाई की दुकानों पर भी आधी रात तक फारेन लीकर (विदेशी शराब) मिलता है। बड़खला सामाजिक सांस्कृतिक तथा भ्रष्टाचार विरोधी संख्या की तरफ से बादल पाल, निखिल देव, पन्नालाल नुनिया एवं विकास चक्रवर्ती ने इस बारे में गहरा चिंता व्यक्त किया है।
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